शनिवार, 8 जुलाई 2017

२६७. घास


क्या आपने बारिश के बाद 
कभी घास की खुशबू महसूस की है?
वैसे तो घास जैसी भी हो,
उसकी अपनी महक होती है,
पीली पड़ गई सूखी घास भी 
बहुत खुशबू बिखेरती है,
बस ज़रूरत इस बात की है 
कि उसे घास न समझा जाय.

अगर घास की ओर देखने का 
हमारा नज़रिया बदल जाय,
तो अनाज में जितनी महक होती है,
घास में उससे कम नहीं होती.

महाराणा प्रताप ने घास की रोटी 
कभी मजबूरी में खाई थी,
पर मजबूरी न भी हो,
तो भी घास की रोटी का 
अपना अलग स्वाद होता होगा,
जैसे उसकी अलग खुशबू होती है.

8 टिप्‍पणियां:

  1. वाह

    घास के लिए आपने अलग अंदाज़ से सोचा
    सुंदर रचना

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (10-07-2017) को "एक देश एक टैक्स" (चर्चा अंक-2662) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. बहुत सुंदर , प्रकृति की हर शय में खूबसूरती होती है।

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  4. घास का सम्बन्ध भी गहरा है इंसान से ...

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  5. घास इस धरती का मूल वस्त्र है सबसे पहला आवरण .

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